Friday, June 19, 2026

Mohd Zahid on Rahul Gandhi

 FBP-1421/26

राहुल गांधी:-
आज राहुल गांधी का जन्म दिन है, उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, वह स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और दिर्घायु रहें, क्योंकि अंततः वही देश में एक बहुत बड़ी आबादी के लिए अंतिम उम्मीद हैं.....
पूरी दुनिया में राहुल गांधी एक मात्र ऐसे राजनीतिक व्यक्ति हैं जिन्हें बिन कुछ किए सबकुछ मिल सकता था, भारत जैसे विशाल देश के प्रधानमंत्री का पद भी मिल सकता था, बल्कि डाक्टर मनमोहन सिंह ने उन्हें प्रधानमंत्री पद आफर भी किया मगर वह व्यक्ति इसे इंकार करके पिछले 22 सालों से सिर्फ संघर्ष कर रहा है ,जिसमें 10 साल केंद्र में उनकी खुद की सरकार रही है।
कहीं धरने पर बैठ रहा है , कहीं हज़ारों किलोमीटर पैदल चल रहा है, कहीं ईडी की घंटों जांच में प्रताणित हो रहा है , कहीं पुलिस की नाकेबंदी के खिलाफ संघर्ष कर रहा है , कहीं अदालतों का चक्कर लगा रहा है, कहीं आटो रिक्शा वालों से , कहीं कुली से , कहीं किसान से , कहीं ट्रक ड्राइवर से कहीं मोची से , कहीं छात्रों से, कहीं हाथरस, कहीं भट्टा पारसौल, कहीं संभल , कहीं मंदसौर.... और कौन इतना सबकुछ कर रहा है ? कोई नहीं।
पिछले 22 सालों से लगातार संघर्ष में राहुल गांधी सत्ता ही नहीं बल्कि संघ द्वारा सैकड़ों करोड़ खर्च करके बनाई उनकी "पप्पू" की छवि के खिलाफ भी संघर्षरत हैं....वह लगातार दोनों मोर्चों पर लड़ रहे हैं इसलिए उनकी लड़ाई दुनिया के नायकों के मुकाबले दोगुनी अधिक है......
राहुल गांधी को लेकर भाजपा और संघ की बिल्कुल स्पष्ट स्ट्रेटजी है, उनके व्यक्तित्व को हल्का और अविश्वसनीय कर दो जिससे उनके उठाए मुद्दे अप्रासंगिक हो जाएं.... संसद से सोशल मीडिया तक यही रणनीति है , उनपर व्यंग्यात्मक आक्रमण करो , उनका मज़ाक उड़ाओ जिससे उनके उठाए सवाल अपना वज़न खो दें।
मैं राहुल गांधी से एक बार 27 मार्च 2017 दिन में 3.00 बजे फेसबुक के दोस्तों के साथ मिला हूं, लंबी मुलाकात थी, यह वह दौर था जब राहुल गांधी के "पप्पू" होने पर किसी को कोई संदेह नहीं था‌, कांग्रेस सोशल मीडिया पर कहीं नहीं थी , सोशल मीडिया पर पूरी तरह भाजपा IT CELL का कब्जा था जो राहुल गांधी की हर बात हर कार्य का मज़ाक़ उड़ाकर उनके व्यक्तित्व को हल्का कर देती थी।
तब उस दिन फेसबुक दोस्तों की लगभग 3 घंटे की राहुल गांधी से बहस मुझे आज भी अक्षरशः याद है , और मेरी राहुल गांधी से 1 टू 1 बहस तो बत्तीमीज़ी की हद तक जा चुकी थी।
मेरे पास कांग्रेस की सरकारों के दौर में मुसलमानों की बदहाली के तीखे सवाल थे
1- मुंबई दंगो को लेकर कांग्रेस सरकार द्वारा ही बनाए गए जस्टिस श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट कांग्रेस ने लागू क्यों नहीं किया?
2- मुसलमानों की बदहाली को लेकर बनी जस्टिस सच्चर कमेटी, जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमेटी, जस्टिस कुंडू कमेटी की रिपोर्ट लागू क्यों नहीं की गई ? लागू करना तो छोड़िए उसे संसद के पटल पर भी क्यों नहीं रखा गया?
3- सवाल तीखे होते चले गए, हाशिमपुरा, मेरठ, मलियाना, मुरादाबाद इत्यादि इत्यादि दंगे कांग्रेस की सरकारों में हुए , पीड़ितों को क्या मिला? न्याय क्यों नहीं मिला?
4- सवाल और तीखे होते चले गए, गुजरात 2002 के बाद 10 साल आपकी सरकार थी आरोपियों को फांसी क्यों नहीं हुई? आप अपने ही पूर्व सांसद एहसान जाफरी को न्याय क्यों नहीं दिला पाए...?
5- मुसलमान आप पर कैसे भरोसा करे ? जबकि कांग्रेस के ही 60 साल की हुकूमत में जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार वह दलितों से भी बद्तर हो गया?
मेरे गुस्से और बत्तीमीज़ी से लबरेज सवाल ऐसे थे जैसे मैं देश की सबसे अधिक दिनों तक सत्ता में रही पार्टी के सर्वोच्च नेता से नहीं बल्कि हिरासत में लिए किसी आरोपी से सवाल कर रहा हूं....
मगर राहुल गांधी संयमित, मुस्कुराते हुए मेरी हर बात सुनते रहे , जवाब देते रहे , तब उन्होंने मेरे साथियों के सामने स्वीकार किया कि आपकी सभी बातें सहीं हैं मगर कांग्रेस पार्टी में संघ के लोग अंदर तक घुसे हुए हैं और उन्होंने ऐसा नहीं होने दिया मगर आप यकीं करें
"राहुल गांधी की कांग्रेस ऐसी नहीं होगी"।
तब उन्होंने कहा था कि दुनिया को लगता है कि राहुल गांधी कांग्रेस में कुछ भी करा सकता है मगर हकीकत यह है कि मुझे भी छोटे छोटे काम के लिए अपनी ही पार्टी में संघर्ष करना पड़ता है और कई बार विफल भी होना पड़ता है।
उन्होंने कहा था कि जो आप बता रहे हैं वह सच है , कांग्रेस से यह सब ही नहीं इससे अधिक भी बहुत कुछ गलतियां हुईं हैं, जो नहीं होनी चाहिए थीं , तो वह कांग्रेस में बैठे संघियों के कारण हुई, मगर अब गलतियां नहीं होगी, आप यकीं करें...
राहुल गांधी ने लगभग 20 मित्रों के सवालों का क्रमानुसार 1 टू 1 ज़वाब दिया, हर एक को लगभग संतुष्ट किया, सिवाय मेरे ....
अंत में फोटोशूट के लिए जब सभी लोग लान में खड़े थे तो वह मेरे पास आए और बोले कि मिस्टर ज़ाहिद जितना गुस्सा आप में है उससे अधिक मुझमें है मगर मैं इसे संभाल कर रखता हूं, वक्त आने पर इसका इस्तेमाल करूंगा.... उम्मीद है आप समझ गये होंगे..…मैं सच में समझ गया था।
यही हमारी पहली और अंतिम मुलाकात थी....
मगर इस मुलाकात ने राहुल गांधी को लेकर हम साथियों के सारे भ्रम को तोड़ कर रख दिया, जैसे उन्होंने हम 20 दोस्तों की पहले से ही पूरी स्टडी कर ली हो , हमारे बारे में उन्हें सब पता हो।
हमारे उन सभी साथियों में एक थे "दिलीप सी मंडल" , राहुल गांधी ने उनपर कुछ अधिक ही जानकारी इकट्ठा की थी , इंट्रोडक्शन में ही ऐसा सवाल किया कि फिर मंडल अगले तीन घंटे चुपचाप बैठे रहे ....
मंडल ने दलाली मिलने की उम्मीद में तपाक से राहुल गांधी को अपना परिचय दिया "मैं दिलीप सी मंडल" इंडिया टुडे का पूर्व संपादक और अब दलित राजनीति करता हूं....
राहुल गांधी का सवाल था, "मगर मंडल तो ओबीसी होते हैं? दलित राजनीति क्यों?
इसके बाद मंडल चूं से चां नहीं बोले , और मुझे एहसास हुआ कि राहुल गांधी का अध्ययन कितना गहरा है क्योंकि मंडल ओबीसी होते हैं मुझे पहली बार पता चला....
फिर हम सभी मित्र राहुल गांधी के पक्ष में तब लिखना शुरू किए जब हर पोस्ट पर राहुल गांधी समेत हमारा भी मज़ाक उड़ाया जाता था, राहुल गांधी लिखते ही पप्पू पप्पू कमेंट की भरमार हो जाती थी और इस कारण राहुल गांधी के पक्ष में कोई लिखना भी नहीं चाहता था....
आज 9 साल बाद से मैं राहुल गांधी को लगातार ओब्ज़र्व कर रहा हूं, भारतीय राजनीति में वह अकेला बंदा है जो अपनी बात से नहीं बदला, ना उसने 9 साल पहले मेरे उसके प्रति आकलन को गलत साबित होने दिया....
इसीलिए मुझे राहुल गांधी पसंद हैं, बेहद पसंद हैं...
वह आलोचना स्विकार करने का साहस रखते हैं, मैं कांग्रेस और राहुल गांधी कि आलोचना करती अपनी हर पोस्ट उन्हें भेजता हूं, अक्सर देखता हूं कि वह मेरी पोस्ट के कुछ वाक्य अपने किसी भाषण में पढ़ रहे होते हैं।
मुझे और कुछ नहीं चाहिए, बस इतना ही....
राहुल गांधी को उनके जन्मदिन पर एक बार फिर बधाई और शुभकामनाएं, बस वह प्रधानमंत्री बन जाएं जिससे मुझे उनके फैसलों की आलोचना का अवसर मिल सके.