20 दिसंबर 2019
मेरठ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA)
और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ
विरोध प्रदर्शन चल रहा था…
नाम आसिफ़, उम्र 20 साल
आसिफ़ ई-रिक्शा चलाने के लिए
सुबह 10 बजे घर से निकले थे
लेकिन ख़बर आई कि आसिफ़ को गोली लगी है
गोली बिल्कुल दिल के पास मारी गई थी,
जो सीने को चीरते हुए कमर से निकल गई…
ऐसा कैसे हो सकता है
कि गोली सैकड़ों मीटर दूर से चलाई जाए
और शरीर के आर-पार हो जाए?
दूसरा नाम मुहम्मद आसिफ़,
उम्र 33 साल
टायर वालों के यहाँ मज़दूरी करता थे
4 बच्चों के पिता थे
घर के अकेला कमाने वाले थे
परिवार किराए के घर में रहता था…
आसिफ़ नमाज़ पढ़कर घर आ रहा थे…
आसिफ़ को गोली पीठ में लगी,
जो सीने की तरफ़ से बाहर निकल गई
फिर वही सवाल…
गोली दूर से मारी गई या बिल्कुल क़रीब से?
तीसरा नाम ज़हीर,
उम्र 45 साल
भैंसों के चारे की मज़दूरी करते थे
काम से वापस घर लौटे रहे थे
पुलिस ने गोली मारी,
कनपटी पर लगी और आर-पार हो गई
फिर वही सवाल…
गोली दूर से मारी गई या बिल्कुल क़रीब से?
चौथा नाम अलीम,
उम्र 23 साल
रोटी बनाने का काम करते थे
कोतवाली के पास एक होटल था,
वहीं अलीम रोटी बनाया करता थे
पुलिस ने दोपहर में ही वह होटल बंद करवा दिया था
अलीम घर लौट रहे थे
उसी वक़्त उनके सिर के पिछले हिस्से में गोली मारी गई,
जिसकी वजह से पीछे से सिर बुरी तरह फट गया था
फिर वही सवाल…
गोली दूर से मारी गई या बिल्कुल क़रीब से?
पांचवां नाम मोहसिन,
उम्र 30 साल
दो बेटों का बाप थे
एक बेटा चार साल का
और दूसरा छह महीने का
भैंसों का चारा लेने गुलज़ार इब्राहिम गली से निकला ही थे
कि पुलिस ने उसी जगह बिल्कुल दिल पर गोली मारी,
जिसकी वजह से पीठ की खाल तक फट गई…
फिर वही सवाल…
गोली दूर से मारी गई या बिल्कुल क़रीब से?
इन पांचों लोगों में कुछ बातें कॉमन थीं।
मज़दूर तबके से थे…
प्रोटेस्ट में शामिल ही नहीं थे…
और सबसे अहम बात यह थी
कि पुलिस प्रशासन ने पांचों की मय्यत को
उनके घर ले जाने नहीं दिया
पांचों की मृत शरीर को दफन करने के लिए
प्रशासन द्वारा इस शर्त पर दी गई
कि शव को सीधा कब्रिस्तान ले जाओगे…
