हैदराबाद ऑपरेशन पोलो में 2,50,000 मुसलमानों का नरसंहार,
1947 में मुसलमानों का नरसंहार जिसमें 5,00000 मुसलमानों का नरसंहार और 3-4 लाख अपनी जान बचाकर पाकिस्तान भाग गए।
फरवरी 1961: जबलपुर दंगे, मध्य प्रदेश - 55 मौतें मुस्लिम आर्थिक नुकसान।
अक्टूबर 1961: अलीगढ़ दंगे, उत्तर प्रदेश - 14 मौतें विश्वविद्यालय कैंपस में हिंदू छात्र की हत्या की अफवाह।
जनवरी 1964: कलकत्ता दंगे, पश्चिम बंगाल - 264 मौतें पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचारों का बदला।
अगस्त 1967: रांची-हटिया दंगे, बिहार - 184 मौतें उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा बनाने के खिलाफ आंदोलन।
सितंबर-अक्टूबर 1969: गुजरात दंगे - 512 मौतें दरगाह में।
भिवंडी जलगांव 1970
1964/ 1979 जमशेदपुर
अगस्त 1980: मुरादाबाद दंगे, उत्तर प्रदेश - 400 मौतें; ईदगाह में सुअर बांध दिया गया।
मई 1981: बिहार शरीफ दंगे, बिहार - 45 मौतें
जुलाई 1982: मेरठ दंगे, उत्तर प्रदेश - 100 मौतें मुस्लिम वकील और नगर पालिका के बीच जमीन विवाद।
फरवरी 1983: नेल्ली नरसंहार, असम - 2,191 मौतें (अनौपचारिक 10,000+) बंगाली मुसलमानों का।
मई 1984: भिवंडी दंगे, महाराष्ट्र - 278 मौतें; मस्जिद पर भगवा झंडा लगाने का विवाद।
फरवरी-अगस्त 1985: गुजरात दंगे, अहमदाबाद - 275 मौते आरक्षण पर गुस्सा मुसलमानों पर टूटा।
अप्रैल-मई 1987: मेरठ दंगे - 346 मौतें; बाबरी मस्जिद को हिंदू पूजा के लिए खोलना।
मई 1988: औरंगाबाद हिंसा - 26 मौतें चुनाव परिणामों का विरोध।
अक्टूबर 1988: मुजफ्फरनगर - 37 मौतें BMAC की रैली।
भागलपुर दंगा 24 अक्टूबर 1989 को शुरू हुआ था।
सितंबर 1989: कोटा हिंसा - 26 मौतें धार्मिक जुलूस।
सितंबर 1989: बदायूं हिंसा - 24 मौतें उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का मुद्दा।
अक्टूबर 1989: इंदौर हिंसा - 23 मौतें राजनीतिक रैली।
अक्टूबर 1989: भागलपुर हिंसा - 1,000+ मौतें हिंदू छात्रों की हत्या की अफवाहें
अप्रैल-अक्टूबर 1990: गुजरात हिंसा - 12 मौतें राजनीतिक जुलूस।
अक्टूबर 1990: राजस्थान हिंसा (उदयपुर, जयपुर)
अक्टूबर 1990: हैदराबाद दंगे - 200+ मौतें; बाबरी मस्जिद का आंशिक विध्वंस।
दिसंबर 1990: आगरा दंगे - 22 मौतें; अज्ञात कारण।
दिसंबर 1990-फरवरी 1991: खुर्जा हिंसा - 96 मौतें बाबरी मस्जिद/राम जन्मभूमि मुद्दा।
मार्च 1991: भद्रक दंगे, ओडिशा - 33 मौतें बाबरी मुद्दा।
मार्च 1991: सहारनपुर हिंसा - 40+ मौतें राम नवमी जुलूस को मस्जिद के पास रोकना।
मई 1991: कानपुर हिंसा - 20 मौतें बाबरी विवाद।
मई 1991: मेरठ हिंसा - 30 मौतें चुनावी हिंसा।
अक्टूबर 1992: सूरत दंगे - 200+ मौतें बाबरी विवाद।
दिसंबर 1992-जनवरी 1993: बॉम्बे दंगे - 900 मौतें बाबरी विध्वंस पर विरोध।
दिसंबर 1992: कर्नाटक (बेंगलुरु आदि) - 30 मौतें उर्दू समाचार प्रसारण।
दिसंबर 1992: कानपुर - 254 मौतें बाबरी विध्वंस।
दिसंबर 1992: असम - 90+ मौतें बाबरी विध्वंस।
दिसंबर 1992: राजस्थान - 60 मौतें बाबरी विध्वंस।
दिसंबर 1992: कलकत्ता - 35 मौतें बाबरी विध्वंस।
दिसंबर 1992: भोपाल - 175 मौतें बाबरी विध्वंस।
अक्टूबर 1994: बेंगलुरु - 25 मौतें दूरदर्शन पर उर्दू प्रसारण।
बड़ौदा सूरत 1994
फरवरी-मार्च 2002: गुजरात दंगे - 1,044 मौतें (आधिकारिक), 2,000 अनौपचारिक; गोधरा ट्रेन जलाने की घटना।
मालेगांव 2006
मुजफ्फरनगर 2013
फरवरी-मार्च 2020: दिल्ली दंगे - 53 मौतें CAA-NRC विरोध।
जुलाई-अगस्त 2023: हरियाणा दंगे (नूंह आदि) - 7 मौतें गौ रक्षक जुलूस।
नोट:- 99% दंगे कांग्रेस शासनकाल में हुए हैं। दंगों के जिम्मेदार सत्ता के संरक्षण में बचे रहे।
ज्ञात रहे जिन्हें इस्तेमाल किया गया और बचाया गया, आज वो सत्ता में हैं।
सत्ता शासन ताश कि गड्डी कि तरह भले ही उपर नीचे हो रहा है लेकिन टार्गेट आज मुस्लिम है।
2002 के विश्वव्यापी किरकिरी के बाद इन लोगों ने पैटर्न बदल दिया था। 2004 में सत्ता में आई कांग्रेस गुजरात दंगों के गुनाहगारों को बढ़े और ताकतवर होने दी।
वहीं दूसरी तरफ सीधे खून-खराबा छोड़कर इस्लामोफोबिया ने बेगुनाहगार बच्चों को जेल में सड़ाना शुरू किया।
नंगी और बिकाऊ मीडिया अपने 100% ब्राह्मणवाद के साथ रोज मुसलमानों का राजनीतिक सामाजिक आर्थिक चीरहरण करती रही।
इस्लामोफोबिया से ग्रस्त गृहमंत्री अपने काम में लगे रहे।
क्या चिदंबरम क्या पाटिल।
उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए एन आर सी आया, मोबलिंचिंग आया, न्यायालयों में बेतुके फैसले आने शुरू हुए, लैंड जिहाद, एस आई आर आया, बुल्डोजर आया।
सनद रहे गाजा वालों को जनसंहार न्याय चाहने के लिए यूएन के कोर्ट में केस लगाना चाहिए। और सही फैसले के लिए लोकतांत्रिक न्याय व्यवस्था में अटूट विश्वास रखना चाहिए।
लड़ाई कागज़ी ही लड़नी चाहिए क्योंकि आखिर में कागज ही काम आती है।
क्योंकि बुजुर्गों ने बंदूक रखकर कागज़ कलम पकड़ लिया था।
शांति के लिए हथियारों का संतुलन होना जरूरी नहीं है कागजों कि फेहरिस्त होना जरूरी है।
Aamir Khan Pathan
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